Akbar Illahabadi Shayari | अकबर इलाहाबादी

 Akbar Illahabadi Shayari | अकबर इलाहाबादी 


नाम- अकबर इलाहाबादी
मूल नाम- सैयद अकबर हुसैन
जन्म- 16 नवम्बर सन् 1846 (इलाहबाद,उत्तर-प्रदेश)
पिता का नाम- सैयद तफ्फज़ुल हुसैन
शिक्षा-वकालत
व्यवसाय- सेशन जज और उर्दू साहित्यकार
मृत्यु- 1 सितम्बर सन् 1921 (इलाहाबाद, उत्तर-प्रदेश)

Apne Pahlu Se Wo Gairon Ko


Akbar Illahabadi Shayari | अकबर इलाहाबादी


अपने पहलू से वो ग़ैरों को उठा ही न सके 
उन को हम क़िस्सा-ए-ग़म अपना सुना ही न सके
Apne Pahlu Se Wo Gairon Ko Utha Hi N Sake
Hum Ko Hum Kissa-e-Gum Apna Suna Hi N Sake
 
ज़ेहन मेरा वो क़यामत कि दो-आलम पे मुहीत 
आप ऐसे कि मिरे ज़ेहन में आ ही न सके 
Zehan Mera Wo Kayamat Ki Do Aalam Pe Muheet
Aap Aise Ki Mere Zehan Me Aa Hi N Sake

देख लेते जो उन्हें तो मुझे रखते म'अज़ूर 
शैख़-साहिब मगर उस बज़्म में जा ही न सके 
Dekh Lete Jo Unhe Toh Mujhe Rakhte Majoor
Shaikh Sahib Magar Us Bazm Me Ja Hi N Sake

अक़्ल महँगी है बहुत इश्क़ ख़िलाफ़-ए-तहज़ीब 
दिल को इस अहद में हम काम में ला ही न सके 
Akl Mehangi Hai Bahut Ishq Khilaaf-e-Tahzeeb
Dil Ko Is Ahad Me Hum Kaam Me Laa Hi N Sake

हम तो ख़ुद चाहते थे चैन से बैठें कोई दम 
आप की याद मगर दिल से भुला ही न सके
Hum To Khud Chahte The Chain Se Baithe Koi Dum
Aap Ki Yaad Magar Dil Se Bhula N Sake
 
इश्क़ कामिल है उसी का कि पतंगों की तरह 
ताब नज़्ज़ारा-ए-माशूक़ की ला ही न सके 
Ishq Kamil Hai Usi Ka Ki Patango Ki Tarah
Taab Najjara-e-Mashooq Ki La Hi N Sake

दाम-ए-हस्ती की भी तरकीब अजब रक्खी है 
जो फँसे उस में वो फिर जान बचा ही न सके 
Daam-e-Hasti Ki Bhi Tarkeeb Ajab Rakkhi Hai
Jo Fase Us Me Wo Phir Jaan Bacha Hi N Sake

मज़हर-ए-जल्वा-ए-जानाँ है हर इक शय 'अकबर' 
बे-अदब आँख किसी सम्त उठा ही न सके
Mazhar-e-Jalwa-e-Jaana Hai Har Ik Shay 'Ajbar'
Be-Adab Aankh Kisi Samt Utha Hi N Sake
 
ऐसी मंतिक़ से तो दीवानगी बेहतर 'अकबर' 
कि जो ख़ालिक़ की तरफ़ दिल को झुका ही न सके
Aisi Mantik Se Toh Deewangi Behtar 'Akbar"
Ki Jo Khaalik Ki Tarah Dil Ko Jhuka Hi N Sake


Final Though: About Akbar Illahabdi In Detail

"अकबर इलाहाबादी" का जन्म 16 नवम्बर सन् 1846 को इलाहबाद के उत्तर-प्रदेश में हुआ।  इनका मूल-नाम "सैयद अकबर हुसैन"  था इलाहाबाद में रहने के कारण ये अकबर इलाहाबादी के नाम से मशहूर हुए  इनके पिता का नाम "सैयद तफ्फज़ुल हुसैन" था जो एक संभ्रांत परिवार से ताल्लुक रखते थे। अकबर इलाहाबादी का विवाह मात्र 15 वर्ष की आयु में उनके उम्र से तीन वर्ष बड़ी कन्या से हो गया बाद में इन्होंने दूसरा विवाह किया और दोनों पत्नियों से इनके दो-दो पुत्र हुए इन्होंने कानून की पढ़ाई की और उच्च न्यायालय में जज के पद से सेवानिवृत्त हुए
इनकी शायरी में समाज को लेकर  काफी हास्य-व्यंग्य देखने को मिलता है  बहुत ही कम आयु में इनकी पत्नी और पोतों के देहावसान से ये काफी दुखी हुए और धार्मिक कार्यो में रूचि रखने लगे सन् 1948 में इनकी चौथी "कुल्लियात" प्रकाशित हुए जिसे लोगो में काफी सराहा गया 1 सितम्बर सन् 1921को इलाहाबाद में उर्दू साहित्य का ये प्रचंड सूर्य हमेशा के लिए अस्त हो गया

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Akbar Illahabadi Shayari | अकबर इलाहाबादी Akbar Illahabadi Shayari | अकबर इलाहाबादी Reviewed by Feel neel on November 30, 2020 Rating: 5

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