Amir Khusrau Poetry In Hindi - अमीर खुसरो हिन्दी कविता

 Amir Khusrau Poetry In Hindi - अमीर खुसरो हिन्दी कविता


Hello Doston Aaj Mai Aapke Liye Lekar Aaya Hu Amir Khusrau Ki Kuch Aisi Kavita Jo Unhone Khud Likhi Thi Kintu Bahut Se Logon Ko Unki Kavitaao Ke Baare Me Pata Hi Nahi Hai...Maine Kuch Chuninda Kavita Ko Yahan Par dalaa Hua Hai Jo Ki Umeed Karta Hu Aap Logon Ko Zarur Pasand Aayegi...Dhanywaad



Aa Ghir Aayi Dayi

आ घिर आई दई मारी घटा कारी। बन बोलन लागे मोर
दैया री बन बोलन लागे मोर।
रिम-झिम रिम-झिम बरसन लागी छाई री चहुँ ओर।
आज बन बोलन लागे मोर।
कोयल बोले डार-डार पर पपीहा मचाए शोर।
आज बन बोलन मोर.........
ऐसे समय साजन परदेस गए बिरहन छोर।
आज बन बोलन मोर.........

Aa Ghir Aayi Dayi Maari Ghata Kaari...Ban Bolan Laage Mor
Daiyaa Re Ban Bolan Laage Mor
Rim-Jhim Rim-Jhim Barsan Laagi Chaayi Ri Chahu Or
Aaj Ban Bolan Laage Mor
Koyal Bole Daar-Daar Par Papiha Machaaye Shor
Aaj Ban Bolan Laage Mor
Aaise Samay Sajan Pardesh Gaye Birhan Cjor
Aaj Ban Bolan Mor...


Amma Mere Baba Ko

अम्मा मेरे बाबा को भेजो री - कि सावन आया
बेटी तेरा बाबा तो बूढ़ा री - कि सावन आया
अम्मा मेरे भाई को भेजो री - कि सावन आया
बेटी तेरा भाई तो बाला री - कि सावन आया
अम्मा मेरे मामू को भेजो री - कि सावन आया
बेटी तेरा मामू तो बांका री - कि सावन आया

Amma Mere Baba Ko Bhejo Ri Ki Sawan Aaya
Beti Tera Baba Toh Boodha Ri Ki Sawan Aaya
Amma Mere Bhayi Ko Bhejo Ri Ki Sawan Aaya
Beti Tera Bhaayi Toh Bola Ri Ki Sawan Aaya
Amma Mere Mamu Ko Bhejo Ri Ki Sawan Aaya
Beti Tera Maamu Toh Baanka Ri Ki Sawan Aaya


Ab Aaye N More Sawariya

अब आए न मोरे साँवरिया, मैं तो तन मन उन पर लुटा देती।
घर आए न मोरे साँवरिया, मैं तो तन मन उन पर लुटा देती।
मोहे प्रीत की रीत न भाई सखी, मैं तो बन के दुल्हन पछताई सखी।
होती न अगर दुनिया की शरम मैं तो भेज के पतियाँ बुला लेती।
उन्हें भेज के सखियाँ बुला लेती।

An N Aaye More Saawariya, Mai Toh Tan Man Un Par Luta Deti
Ghar Aaye N More Sawariyaa, Mai Toh Tan Man Un Par Luta Deti
Mohe Preet Ki Reet N Bhaai Sakhi, Mai To Ban Ke Dulhan Pachtaayi
Hoti N Agar Duniya Ki Sharam Mai Toh Bhej Ke Patiyaan Bula Leti
Unhe Bhej Ke Sakhiyaan Bula Leti


2 Line Poetry Of Amir Khusrau

खुसरो रैन सुहाग की, जागी पी के संग।
तन मेरो मन पियो को, दोउ भए एक रंग।।

Khusrau Rain Suhaag Ki, Jaagi Pee Ke Sang
Tan Mero Man Piyo Ko, Dau Bhaye Ek Rang

खुसरो दरिया प्रेम का, उल्टी वा की धार।
जो उतरा सो डूब गया, जो डूबा सो पार।।

Khusrau Dariya Prem Ka, Ulti Waa Ki Dhaar
Jo Utara So Doob Gaya, Jo Dooba So Paar

खीर पकायी जतन से, चरखा दिया जला।
आया कुत्ता खा गया, तू बैठी ढोल बजा।।

Kheer Pakaayi Jatan Se, Charkha Diya Jala
Aaya Kutta Kha Gaya, Tu Baithi Dhol Jala

गोरी सोवे सेज पर, मुख पर डारे केस।
चल खुसरो घर आपने, सांझ भयी चहु देस।।

Gori Sowe Sej Par, Mukh Par Daare Kes
Chal Khusrau Ghar Aapne, Sanjh Bhayi Chahu Desh

खुसरो मौला के रुठते, पीर के सरने जाय।
कहे खुसरो पीर के रुठते, मौला नहिं होत सहाय।।

Khusrau Maula Ke Roothate, Peer Ke Sarne Jaaye
Kahe Khusrau Peer Ke Roothate, Maula Nahi Hot Sahaay

रैनी चढ़ी रसूल की सो रंग मौला के हाथ।
जिसके कपरे रंग दिए सो धन धन वाके भाग।।

Rain Chadhi Rasool Ki So Rang Maula ke Hath
Jiske Kapre Rang Diye So Dhan-Dhan Vaake Bhaag

खुसरो बाजी प्रेम की मैं खेलूँ पी के संग।
जीत गयी तो पिया मोरे हारी पी के संग।।

Khusrau Baazi Prem Ki Mai Khelu Pee Ke Sang
Jeet Gayi Toh Piya More Haari Pee Ke Sang

चकवा चकवी दो जने इन मत मारो कोय।
ये मारे करतार के रैन बिछोया होय।।

Chakawa-Chakawi Do Jane In Mat Maaro Koy
Ye Maare Kartaar Ke Rain Bichoya Hoy

खुसरो ऐसी पीत कर जैसे हिन्दू जोय।
पूत पराए कारने जल जल कोयला होय।।

Khusrau Aisi Preet Kar Jaise Hindu Hoy
Poot Paraye Karane Jal-Jal Koyala Hoy

खुसरवा दर इश्क बाजी कम जि हिन्दू जन माबाश।
कज़ बराए मुर्दा मा सोज़द जान-ए-खेस रा।।

Khusaru Dar Ishq Baazi Kam Zi Hindu Jan Mabaash
Kaz Baraye Murda Ma Sozad Jaan-e-Khes Ra

उजवल बरन अधीन तन एक चित्त दो ध्यान।
देखत में तो साधु है पर निपट पाप की खान।।

Ujawal Baran Adheen Tan Ek Chitt Do Dhyaan
Dekhat Mai Toh Sadhu Hai Par Nipat Paap Ki Khan

श्याम सेत गोरी लिए जनमत भई अनीत।
एक पल में फिर जात है जोगी काके मीत।।

Shayam Set Gori Liye Janmat Bhayi Aneet
Ek Pal Me Phir Jaat Hai Jogi Kaake Meet

पंखा होकर मैं डुली, साती तेरा चाव।
मुझ जलती का जनम गयो तेरे लेखान भाव।।

Pankha Hokar Mai Duli, Saati Tera Chaaw
Mujh Jalti Ka Janam Gayo Tere Lekhaan Bhaaw

नदी किनारे मैं खड़ी सो पानी झिलमिल होय।
पी गोरे मैं साँवरी अब किस विध मिलना होय।।

Nadi Kinaare Mai Khadi So Paani Jhilmil Hoy
Pee Gore Mai Sawari Ab Kis Bidh Milna Hoye

साजन ये मत जानियो तोहे बिछड़त मोको चैन।
दिया जलत है रात में और जिया जलत बिन रैन।।

Sajan Ye Mat Jaaniyo Tohe Bichrat MokoChain
Diya Jalat Hai Raat Me Aur Jiya Jalat Bin Rain

रैन बिना जग दुखी और दुखी चन्द्र बिन रैन।
तुम बिन साजन मैं दुखी और दुखी दरस बिन नैंन।।

Rain Bina Jag Dukhi Aur Dukhi Chandra Bin Rain
Tum Bin Sajan Mai Dukhi Aur Dukhi Daras Bin Nain

अंगना तो परबत भयो, देहरी भई विदेस।
जा बाबुल घर आपने, मैं चली पिया के देस।।

Angana Toh Parbat Bhayo, Dehari Bhayi Vides
Ja Babul Ghar Aapne,Mai CHali Piya Ke Desh

आ साजन मोरे नयनन में, सो पलक ढाप तोहे दूँ।
न मैं देखूँ औरन को, न तोहे देखन दूँ।

Aa Sajan More Naynan Me, So Palak Dhaap Tohe Du
N Mai Dekhu Auran Ko, N Tohe Dekhan Du

अपनी छवि बनाई के जो मैं पी के पास गई।
जब छवि देखी पीहू की तो अपनी भूल गई।।

Apni Chavi Banaayi Ke Jo Mai Pee Ke Pass Gayi
Jab Chavi Dekhi Peehu Ki Toh Apni Bhool Gayi

खुसरो पाती प्रेम की बिरला बाँचे कोय।
वेद, कुरान, पोथी पढ़े, प्रेम बिना का होय।।

Khusrau Paati Prem Ki Birla Baanche Koy
Ved, Kuraan, PothiPadhe, Prem Bina Ka Hoye

संतों की निंदा करे, रखे पर नारी से हेत।
वे नर ऐसे जाऐंगे, जैसे रणरेही का खेत।।

Santon Ki Ninda karein, Rakhe Par Naari Se Het
Ve Nar Aise Jayenge, Jaise Ranrehi Ka Khet

खुसरो सरीर सराय है क्यों सोवे सुख चैन।
कूच नगारा सांस का, बाजत है दिन रैन।।

Khusrau Sareer Saraay Hai Kyon Khove Sukh Chain
Kooch Nagara Sans Ka, Bajat Hai Din Rain

जब यार देखा नैन भर दिल की गई चिंता उतर 
ऐसा नहीं कोई अजब राखे उसे समझाए कर ।

Jab Yaar Dekha Nain Bhar Dil Ki Gayi Chinta Utar
Aisa Nahi Koi Ajab Raakhe Use Samjhaaye Kar

जब आँख से ओझल भया, तड़पन लगा मेरा जिया
हक्का इलाही क्या किया, आँसू चले भर लाय कर

Jab Aankho Se Ojhal Bhaya, Tadpan Laga Mera iya
Hakka Ilaahi Kya Kiya, Aansu Chale Bhar Laaye Kar

तू तो हमारा यार है, तुझ पर हमारा प्यार है
तुझ दोस्ती बिसियार है एक शब मिली तुम आय कर।

Tu Toh Hamara Yaar Hai, Tujh Par Hamara Pyaar Hai 
Tujh Dosti Bisiyaar Hai Ek Shab Mili Tum Aaay Kar 

जाना तलब तेरी करूँ दीगर तलब किसकी करूँ
तेरी जो चिंता दिल धरूँ, एक दिन मिलो तुम आय कर । 

मेरी जो मन तुम ने लिया, तुम उठा गम को दिया
तुमने मुझे ऐसा किया, जैसा पतंगा आग पर । 

खुसरो कहै बातों ग़ज़ब, दिल में न लावे कुछ अजब
कुदरत खुदा की है अजब, जब जिव दिया गुल लाय कर ।


Bahut Kathin Hai Dagar

बहुत कठिन है डगर पनघट की।
कैसे मैं भर लाऊँ मधवा से मटकी
मेरे अच्छे निज़ाम पिया।
कैसे मैं भर लाऊँ मधवा से मटकी
ज़रा बोलो निज़ाम पिया।
पनिया भरन को मैं जो गई थी।
दौड़ झपट मोरी मटकी पटकी।
बहुत कठिन है डगर पनघट की।
खुसरो निज़ाम के बल-बल जाइए।
लाज राखे मेरे घूँघट पट की।
कैसे मैं भर लाऊँ मधवा से मटकी
बहुत कठिन है डगर पनघट की।


09
काहे को ब्याहे बिदेस, अरे, लखिय बाबुल मोरे 
काहे को ब्याहे बिदेस 
भैया को दियो बाबुल महले दो-महले 
हमको दियो परदेस 
अरे, लखिय बाबुल मोरे 
काहे को ब्याहे बिदेस 
हम तो बाबुल तोरे खूँटे की गैयाँ 
जित हाँके हँक जैहें 
अरे, लखिय बाबुल मोरे 
काहे को ब्याहे बिदेस 
हम तो बाबुल तोरे बेले की कलियाँ  
घर-घर माँगे हैं जैहें 
अरे, लखिय बाबुल मोरे 
काहे को ब्याहे बिदेस 
कोठे तले से पलकिया जो निकली 
बीरन में छाए पछाड़ 
अरे, लखिय बाबुल मोरे 
काहे को ब्याहे बिदेस 
हम तो हैं बाबुल तोरे पिंजरे की चिड़ियाँ 
भोर भये उड़ जैहें 
अरे, लखिय बाबुल मोरे 
काहे को ब्याहे बिदेस 
तारों भरी मैनें गुड़िया जो छोडी़ 
छूटा सहेली का साथ 
अरे, लखिय बाबुल मोरे 
काहे को ब्याहे बिदेस 
डोली का पर्दा उठा के जो देखा 
आया पिया का देस 
अरे, लखिय बाबुल मोरे 
काहे को ब्याहे बिदेस 
अरे, लखिय बाबुल मोरे 
काहे को ब्याहे बिदेस 
अरे, लखिय बाबुल मोरे 

(इस रचना के कुछ अंशो को हिन्दी फ़िल्म उमराओ जान के लिये जगजीत कौर ने ख़्य्याम के संगीत में गाया भी है)

Chaap Tilak Sab Cheeni Re

छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाइके
प्रेम भटी का मदवा पिलाइके
मतवारी कर लीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके
गोरी गोरी बईयाँ, हरी हरी चूड़ियाँ
बईयाँ पकड़ धर लीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके
बल बल जाऊं मैं तोरे रंग रजवा
अपनी सी रंग दीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके
खुसरो निजाम के बल बल जाए
मोहे सुहागन कीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके
छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाइके

Bahot Rahi Babul Ghar Dulhan

बहोत रही बाबुल घर दुल्हन, चल तोरे पी ने बुलाई।
बहोत खेल खेली सखियन से, अन्त करी लरिकाई।
बिदा करन को कुटुम्ब सब आए, सगरे लोग लुगाई।
चार कहार मिल डोलिया उठाई, संग परोहत और भाई।
चले ही बनेगी होत कहाँ है, नैनन नीर बहाई।
अन्त बिदा हो चलि है दुल्हिन, काहू कि कछु न बने आई।
मौज-खुसी सब देखत रह गए, मात पिता और भाई।
मोरी कौन संग लगन धराई, धन-धन तेरि है खुदाई।
बिन मांगे मेरी मंगनी जो कीन्ही, नेह की मिसरी खिलाई।
एक के नाम कर दीनी सजनी, पर घर की जो ठहराई।
गुण नहीं एक औगुन बहोतेरे, कैसे नोशा रिझाई।
खुसरो चले ससुरारी सजनी, संग कोई नहीं आई

Pardeshi Balam Dhan Akeli

परदेसी बालम धन अकेली मेरा बिदेसी घर आवना।
बिर का दुख बहुत कठिन है प्रीतम अब आजावना।
इस पार जमुना उस पार गंगा बीच चंदन का पेड़ ना।
इस पेड़ ऊपर कागा बोले कागा का बचन सुहावना।

Jo Piya Aawan Kah Gaye

जो पिया आवन कह गए अजहुँ न आए, अजहुँ न आए स्वामी हो
ऐ जो पिया आवन कह गए अजुहँ न आए। अजहुँ न आए स्वामी हो।
स्वामी हो, स्वामी हो। आवन कह गए, आए न बाहर मास।
जो पिया आवन कह गए अजहुँ न आए। अजहुँ न आए।
आवन कह गए। आवन कह गए।

Mora Jobana Navelara

मोरा जोबना नवेलरा भयो है गुलाल।
कैसे घर दीन्हीं बकस मोरी माल।
निजामुद्दीन औलिया को कोई समझाए, ज्यों-ज्यों मनाऊँ
वो तो रुसो ही जाए।
चूडियाँ फूड़ों पलंग पे डारुँ इस चोली को मैं दूँगी आग लगाए।
सूनी सेज डरावन लागै। बिरहा अगिन मोहे डस डस जाए।
मोरा जोबना।

Ae Ri Sakhi More Piya

ऐ री सखी मोरे पिया घर आए
भाग लगे इस आँगन को
बल-बल जाऊँ मैं अपने पिया के, चरन लगायो निर्धन को।
मैं तो खड़ी थी आस लगाए, मेंहदी कजरा माँग सजाए।
देख सूरतिया अपने पिया की, हार गई मैं तन मन को।
जिसका पिया संग बीते सावन, उस दुल्हन की रैन सुहागन।
जिस सावन में पिया घर नाहि, आग लगे उस सावन को।
अपने पिया को मैं किस विध पाऊँ, लाज की मारी मैं तो डूबी डूबी जाऊँ
तुम ही जतन करो ऐ री सखी री, मै मन भाऊँ साजन को।

Jo Mai Janati Bisrat Hai Saiyaa

जो मैं जानती बिसरत हैं सैय्या
जो मैं जानती बिसरत हैं सैय्या, घुँघटा में आग लगा देती,
मैं लाज के बंधन तोड़ सखी पिया प्यार को अपने मान लेती।
इन चूरियों की लाज पिया रखाना, ये तो पहन लई अब उतरत न।
मोरा भाग सुहाग तुमई से है मैं तो तुम ही पर जुबना लुटा बैठी।
मोरे हार सिंगार की रात गई, पियू संग उमंग की बात गई
पियू संत उमंग मेरी आस नई।

अब आए न मोरे साँवरिया, मैं तो तन मन उन पर लुटा देती।
घर आए न तोरे साँवरिया, मैं तो तन मन उन पर लुटा देती।
मोहे प्रीत की रीत न भाई सखी, मैं तो बन के दुल्हन पछताई सखी।
होती न अगर दुनिया की शरम मैं तो भेज के पतियाँ बुला लेती।
उन्हें भेज के सखियाँ बुला लेती।
जो मैं जानती बिसरत हैं सैय्या।


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