Mohsin Naqvi Nazm In Hindi - मोहसिन नक़वी

 Mohsin Naqvi Nazm In Hindi - मोहसिन नक़वी


Hello Friends Aaj Hum Aap Ke Liye Lekar Aaye Hai mohsin naqvi ki badi pyaari nazm jo aap ke dil ko chu jayegi "Kisi Ke Door Jaane Se" ye yakinan aap ko pasand ayaegi kyuki in lafzon me khaasa dard dikhayi deta hai....to aap log apne dard ke anusaar ise apas me baant le ...thank you

Mohsin Naqvi Nazm In Hindi - मोहसिन नक़वी


Kisi Ke Door Jaane Se

किसी के दूर जाने से 
ताल्लुक टूट जाने से 
किसी के मान जाने से 
किसी के रूठ जाने से 
मुझे अब डर नहीं लगता 

Kisi Ke Door Jaane Se
Talluk Toot Jaane Se
Kisi Ke Maan Jaane Se
Kisi Ke Rooth Jaane Se
Mujhe Ab Dar Nahi Lagta

किसी को आज़माने से 
किसी के आज़माने से 
किसी को याद रखने से 
किसी को भूल जाने से 
मुझे अब डर नहीं लगता 

Kisi Ko Aajmaane Se
Kisi Ke Aazmaane Se
Kisi Ko Yaad Rakhne Se
Kisi Ko Bhool Jaane Se
Mujhe Ab Dar Nahi Lagta

किसी को छोड़ देने से 
किसी के छोड़ जाने से 
ना शम्मा को जलाने से 
ना शम्मा को बुझाने से 
मुझे अब डर नहीं लगता 

Kisi Ko Chhod Dene Se
Kis Ke Chhod Jaane Se
Na Shamma Ko Jalane Se
Na Shamma Ko Bujhane Se
Mujhe Ab Dar Nahi Lagta

अकेले मुस्कुराने से 
कभी आँसू बहाने से 
ना इस सारे ज़माने से 
हक़ीक़त से फ़साने से 
मुझे अब डर नहीं लगता 

Akele Muskurane Se
Kabhi Ansu Bahane Se
Na Is Saare Jamane Se
Haqiqat Se Fasane Se
Mujhe Ab Dar Nahi Lagta

किसी की ना-रसाई से 
किसी की पारसाई से 
किसी की बेवफ़ाई से 
किसी दुख इंतिहाई से 
मुझे अब डर नहीं लगता 

Kisi Ki Naa-Rasaai Se
Kisi Ki Paarsaai Se
Kisi Ki Bewafaai Se 
Kisi Dukh Intehaai se
Mujhe Ab Dar Nahi Lagta

ना तो इस पार रहने से 
ना तो उस पार रहने से 
ना अपनी ज़िंदगानी से 
ना इक दिन मौत आने से 
मुझे अब डर नहीं लगता 

Naa Toh Is Paar Rehne Se
Naa Toh Us Paar Rehne Se
Naa Apni Zindagani Se
Naa Ik Din Maut Aane Se
Mujhe Ab Dar Nahi Lagta


Wo Toh Yun Tha ki Hum


वो तो यूँ था कि हम 
अपनी अपनी ज़रूरत की ख़ातिर 
अपने अपने तक़ाज़ों को पूरा किया 
अपने अपने इरादों की तकमील में 
तीरा-ओ-तार ख़्वाहिश की संगलाख़ राहों पे चलते रहे 
फिर भी राहों में कितने शगूफ़े खिले 
वो तो यूँ था कि बढ़ते गए सिलसिले 
वर्ना यूँ है कि हम 
अजनबी कल भी थे 
अजनबी अब भी हैं 
अब भी यूँ है कि तुम 
हर क़सम तोड़ दो 
सब ज़िदें छोड़ दो 
और अगर यूँ न था तो यूँ ही सोच लो 
तुम ने इक़रार ही कब किया था कि मैं 
तुम से मंसूब हूँ 
मैं ने इसरार ही कब किया था कि तुम 
याद आओ मुझे 
भूल जाओ मुझे 

Wo Toh Yun Tha Ki Hum 
Apni-Apni Jarurat Ki Khaatir
Apne-Apne Takaajo Ko Pura Kiya
Apne-Apne Iraadon Ki Takmeel Me
Teer-O-Taar Khwahish Ki Sanglakh Raahon Pe Chalte Rahe
Phir Bhi Raahon Me Kitne Shaguphe Khile
Wo Toh Yun Tha Ki Badhte Gaye Silsile
Warna Yun Hai Ki Hum
Ajnabi Kal Bhi The
Ajnabi Aaj Bhi Hai
Ab Bhi Yun Hai Ki Tum
Har Kasam To Do
Sab zidein Chhod Do
Aur Agar Yun Naa Tha Toh Yun Hi Soch Lo
Tumne Ikraar Ki Kab Kiya Tha
Ki Mai Tumse Mansoob Hoon
Maine Israar Hi Kab Kiya Tha 
Ki Tum Yaad Aao Mujhe
Bhool Jaao Mujhe


Zindagi Lafz hai

ज़िंदगी लफ़्ज़ है 
मौत भी लफ़्ज़ है 
ज़िंदगी की तराशी हुई अव्वलीं सौत से सरहद-ए-मौत तक लफ़्ज़ ही लफ़्ज़ हैं 
साँस भी लफ़्ज़ है 
साँस लेने की हर इक ज़रूरत भी लफ़्ज़ों की मुहताज है 
आग पानी हवा ख़ाक सब लफ़्ज़ हैं 
आँख चेहरा जबीं हाथ लब लफ़्ज़ हैं 
सुब्ह-ओ-शाम-ओ-शफ़क़ रोज़-ओ-शब लफ़्ज़ हैं 
वक़्त भी लफ़्ज़ है 
वक़्त का साज़-ओ-आहंग भी 
रंग भी संग भी 
अम्न भी जंग भी 
लफ़्ज़ ही लफ़्ज़ हैं 
फूल भी लफ़्ज़ है 
धूल भी लफ़्ज़ है 
लफ़्ज़ क़ातिल भी है 
लफ़्ज़ मक़्तूल भी 
लफ़्ज़ ही ख़ूँ-बहा 
लफ़्ज़ दस्त-ए-दुआ 
लफ़्ज़ अर्ज़-ओ-समा 
सुब्ह-ए-फ़स्ल-ए-बहाराँ भी इक लफ़्ज़ है 
शाम-ए-हिज्र-ए-निगाराँ भी इक लफ़्ज़ है 
रौनक़-ए-बज़्म-ए-याराँ भी इक लफ़्ज़ है 
महफ़िल-ए-दिल-फ़िगाराँ भी इक लफ़्ज़ है 
मैं भी इक लफ़्ज़ हूँ 
तू भी इक लफ़्ज़ है 
आ कि लफ़्ज़ों की सूरत फ़ज़ाओं में मिल कर बिखर जाएँ हम 
इक नया लफ़्ज़ तख़्लीक़ कर जाएँ हम 
आ कि मर जाएँ हम

Us Samt N Jaana

उस सम्त न जाना जान मिरी 
उस सम्त की सारी रौशनियाँ 
आँखों को बुझा कर जलती हैं 
उस सम्त की उजली मिट्टी में 
नागिन आशाएँ पलती हैं 
उस सम्त की सुब्हें शाम तलक 
होंटों से ज़हर उगलती हैं 
उस सम्त न जाना जान मिरी 
उस सम्त के आँगन मक़्तल हैं 
उस सम्त दहकती गलियों में 
ज़हरीली बास का जादू है 
उस सम्त महकती कलियों में 
काफ़ूर की क़ातिल ख़ुश्बू है 
उस सम्त की हर दहलीज़ तले 
शमशान है जलते जिस्मों का 
उस सम्त फ़ज़ा पर साया है 
बे-मा'नी मुबहम इस्मों का 
उस सम्त न जाना जान मिरी 
उस सम्त की सारी फुल-झड़ियाँ 
बारूद की ताल में ढलती हैं 
उस सम्त के पत्थर रस्तों में 
मुँह-ज़ोर हवाएँ चलती हैं 
उस सम्त की सारी रौशनियाँ 
आँखों को बुझा कर जलती हैं 
उस सम्त के वहमों में घर कर 
खो बैठोगी पहचान मिरी 
उस सम्त न जाना जान मिरी 




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